होमिओपॅथि यह १७९४ में जर्मनी में उगम हुई औषधी की शाखा है, जो सामाईकता के नियम पर आधारीत है। एक मार्ग से यह लसीकरण का आधुनिक स्वरुप है, जहॉं मरीज में बिमारी की उत्पत्ती करने वाला घटक, औषधी की मात्रा के हर एक मिनट के साथ बिमारी का निवारण करने का कार्य करता है।
होमिओपॅथि लसीकरण के आगे जाकर कार्य करती है। यहॉं दिये जाने वाली दवाई की मात्रा अविश्वसनिय रुप में कम होती है, जो हानीकारक ना होते हुए भी प्रभावी होती है।
पारंपारीक दवाईयों के मुकाबले में, होमिओपॅथि का कार्य ज्यादा सुरक्षित, परिणामकारी, धीमी गतीयुक्त और ज्यादा समय तक शारिरीक उर्जा को प्रभावित करने वाले परिणाम देने वाली प्रणाली है।
होमिओपॅथि संशोधन और जनजागरण को बढावा देने वाली नये और आधुनिक दवाईयों में से है।
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होमिओपॅथिक दवाईंयां कैसे कार्य करती हैं इस पर प्रबंध हैं। आरोग्य विषयक प्रमुख परिक्षणों की सहाय्यता लेकर और नित्य प्रयोग में शरीर की आंतरीक शक्ती को बढाने के कार्य पर विश्वास किया जाता है।
उदाहरण स्वरुप संसर्ग से होने वाले बिमारीयों में,ऍंटिबॉडीज का निर्माण, संरक्षक रक्त पेशीयां इ.को उद्दिपीत करने का कार्य किया जाता है।
असंक्राम्य बिमारीयों की अवस्था में, यह संक्रामकता को दूर करने की योजना पर कार्य करती है।
दर्दनाक अवस्था में, यह शरीर के दर्द को कम करने वाली योजना को कार्यान्वयीत करती है।
इसी प्रकार इसका कार्य ऍंटिपास्मोडीक, फैलाव रोकने वाला, संक्रामकता का नियंत्रण करनेवाला, प्रदाह विरोधी, संप्रेरकों को उद्दिपीत करने वाला,कॅन्सरजन्य ना होने वाला इ. विषयों पर ध्यान देने वाला होना चाहिये।
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होमिओपॅथि एक औषधी शाखा होने के साथ साथ अतिउच्च प्रकार की शक्ती है।
विशेषत: बार बार होनेवाली, लंबे समय से चली आ रही और हमेशा होने वाली बिमारीयां जैसे फैलनेवाली बिमारीयां, ब्रांकायटीस, दीर्घकालीन बिमारीयां, सोरायसीस, संधिवात, साईनस, ट्रायजेमिनल न्युरालजिया, अलसरेटीव कोलाईटीस, व्हीटीलीगो, इ. बिमारीयों में होमियोपॅथि मरीज के संपूर्ण जीवन को बदल देने वाले परीणाम देता है।
दमे की और अर्टीकेरीया जैसी बिमारीयों में ये शरीर की रोधक्षमता को बढाती है ताकि शरीर उसके बाद से असामान्य रुप से काम ही ना करे जिससे श्वसन धमनी का सिकुडना, हिस्टामिन का बहाव ,शोथ आदी ना होl
व्रणकारी बिमारीयॉ जैसे (अल्सरेटीव कोलायटीस)में रोधक्षमता बढती है जिससे व्रण ठीक हो सकता हैl
दीर्घकालीन बिमारीयॉ जैसे की (हिपेटायटीस सी)में विषाणुओंका काम कम करती है और उनकी संख्या पर भी रोक लगती है l
ये सारे दीर्घकालीन बिमारियॉ के लिये सच है l
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